शान है तो बान हैं
ब्रह्माण्ड है तो जान हैं
तू लल्ला : तू प्राण हैं
मिट्टी तेरी पान हैं ||
सोच तेरा छान हैं
कार्य - कार्य गान हैं
गुप - गोप्य बाण हैं
पुरुष तू स्वाभिमान हैं ||
तू नग का नगिना हैं
दृश्य का हसीना हैं
दूर - दृष्टि धान हैं
सत्ता अभिमान हैं ||
धक - धक धड्कन हैं
युवा का तू कण-कण है
बुन्द जल का तर्पण हैं
मर्यादा पुरुषोत्तम जैसा तेरा चरित्र हैं ||
वायु का प्रभाव नहीं
अग्नि - अग्नि काल नहीं
तू कभी रुकेगा नहीं
राजेश: हैं तू - झुकेगा नहीं ||
रचनाकार: दिपक सर्राफ