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वीरगञ्ज । चली चली वीरगञ्ज गहवा माई के रथ यात्रा में,
घंटी बाजे, शंख बजे, भक्ति लहर बा ई जात्रा में।

बच्चा, बुढ़वा, जवान सब, नाचे झूमे ताल पे,
माई के जयकारा गूंजे, सारा बजारिया सजे चुनरी के लाल पे।

फूलन से सजल रथवा, छतर काढल नाग देउता घुमीहन नागरिया में
दूध-फल से भरल थाली, गूंजे माई के शहरिया में |

जय जयकार कह के निकली भीड़ हजारों के टोली में,
मइया के रथ खींचे, सजाके सोना के डोली में।

धरती अंबर धन्य हो जाई, जब मइया के रथ निकली पावन समईया में,
गहवा माई के किरपा से, दुख दूर होजाई
नाङ्गा पैर के चलईया में |

नारियल चढी, लड्डु चढी 
जग मग होई पावन ई दिन लाखबत्ती के  किरणिया से,
भक्तजन के अचरा भरी 
आशीर्वाद से भरल माई के प्रसदिया से |

रचनाकार दिपक सर्राफ

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