देख ता आँखिया,
याद आवता बुढ - पुरनीया के बतिया,
कि बबुआ हामार
पनीया जियान ना कर |
घर - घर से निकल गईल
लोटा, बाल्टी अउर कनिया
ना बहाव अब फालतू पनीया,
कि गलतिया आपन स्वीकार कर |
कल - नल - खेत सूखलन,
सूख गइल झरणिया।
बूँद-बूँद के किम्मत बुझाइल,
सगरो गाँव के नजरिया।
खोज - तलास में जुटे,
पलिया आवे, बिजुली कटे।
टंकी सूना, मोटर सुस्ताइल,
हे कोइला माता
हामार गलती माफ कर |
बुझ गैनी किम्मत तहार,
ताहार - महिमा अपरम्पार |
पानी रे पानी दुखिया कहे,
हे गंगा मैया - अब तू सम्भार कर |
दिपक सर्राफ