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नेता जी पनिया पियाईना

दुअरिया के फुल सुख गइल,
हमार गईया के जगाईना।
दुःखे आँसू बचवतानी,
नेता जी पनिया पियाईना॥

दर्शन दुर्लभ हो गइल,
हे नेता जी — "तंका कावरिया ढचकाईना।”
सत्ता के खेल बाद में खेलीं,
पहिले हीहारा बुझाईना॥

निंदिया ना आवत बा रतिया में,
रोवता करेजवा हमार।
हे नेता जी — “पनिया के अगिया सुलझाईना”,
लइकन स्कूल जइहें सबेरे —
एतना मत तड़पाईना॥

बातन के खेल बहुत होइ,
अब कुछ जादू देखाईना।
हमार दुवारिया पे चरण धरि,
धरती के हरियाईना॥

चुनाव में दिहनी अँगुरी के निशान,
अब पाँव ना फिसलाइना।
लइकन भूखल-पियासल बा,
जूठा बरतन घामे ना झुरवाइना॥

अब ना चली भरोसे के बात,
काम से ईमानदारी देखाईना।
जनता के पीड़ा बुझ जाई,
हे नेता जी “ना त कुर्सी बच पाईना”॥

रचनाकार : दिपक सर्राफ

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